जिस प्रकार समस्त गुण 'विनम्रता' में आश्रय पाते हैं, उसी प्रकार सारे गुण 'अहंकार' का आश्रय पाते ही नष्ट भी हो जाते हैं।
जिस प्रकार समस्त गुण 'विनम्रता' में आश्रय पाते हैं, उसी प्रकार सारे अवगुण 'अहंकार' के आश्रय में फलते-फूलते हैं।
परम ज्ञानी रावण इसका जीता-जागता उदाहरण है। अतः विनम्र बनें, अहंकारी नहीं।
पेड़-पौधे, नदियाँ-झरने पाते यदि बोल,
सबसे पहले मानव की ही खोलते वो पोल।
सबसे पहले मानव की खोल देते पोल।
एक ओर तो पूजता पूजा करके हमारी
फिर बर्बाद धरती को कर रहा
समझ न पाया कया मोल
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